सातवें वेतन आयोग: 'भत्तो की जाँच के लिए गठित लवासा कमिटी' की रिपोर्ट जमा करने की अगली संभावित तारीख 28 अप्रैल

नई दिल्ली, 24 अप्रैल: लगभग 10 महीने बीत जाने के बाद भी सांतवे वेतन आयोग द्वारा सिफारिश की गई 'भत्तो की जाँच के लिए गठित लवासा कमिटी' अपनी रिपोर्ट जमा नहीं कर पाई है. अभी तक रिपोर्ट वितमंत्री को सौपने की सम्भाव‍ित तारीख "अगले सप्ताह " कहे या फिर कहे "अगले तारिक", के चक्रव्‍यूह से बाहर आती नहीं दिख रही है. जबकि केंद्रीय कर्मचारी वेतन वृद्धि एवं संशोधित भत्तो के लिए बहुत ही उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं.

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विभिन्न मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अब सरकार भी सांतवे वेतन आयोग द्वारा सिफारिश की गई 'भत्तो की जाँच के लिए गठित लवासा कमिटी' की रिपोर्ट सौपने का बड़े उत्सुकता से इन्तजार कर रही है. ऐसा माना जा रहा है कि लवासा कमिटी  संशोधित भत्तो पर तैयार अपनी रिपोर्ट 28 अप्रैल को केंद्र सरकार को सौपने जा रही है, जब वित मंत्री श्री अरुण जेटली,  अमेरीका और रुस की अपनी विदेश यात्रा खत्म करके देश लौटेंगे. Read Also: 7th Pay Commission Allowances news:PM Narendra Modi is our last hope, says NJCA

राष्ट्रीय संयुक्त कार्य परिषद (एनजेसीए) के प्रमुख श्री शिवगोपाल मिश्रा का कहना है, विभिन्न मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कि केंद्रीय कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा अब अपना धैर्य खोने के कगार पे पहुच छुके है, लगभग 1 करोड़ सरकारी कर्मचारी- केंद्र सरकार के पेरोल पर काम कर रहे 43 लाख कर्मचारी और लगभग 57 लाख पेंशनधारियों की नजर 28 अप्रैल पे टीकी हुई है, जब वित मंत्री श्री अरुण जेटली अपनी विदेश यात्रा खत्म करके देश लौटेंगे. Also read: सांतवे वेतन आयोग के भत्तों में हो रही डिजाइनर देरी: आशाएं अगले माह के लिए टली

श्री मिश्रा का ये भी कहना है कि यदि सांतवे वेतन आयोग द्वारा सिफारिश की गई भत्तो की जाँच के लिए गठित लवासा कमिटी' की रिपोर्ट जमा करने में और अधिक विलम्ब हुई तो वे सीधे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के ओर अपना रुख करेंगे. केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ही आखिरी उम्मीद है, क्योंकि ऐसा माना जा रहा हैं कि यदि प्रधान मंत्री इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करते हैं, तो न्यूनतम मजदूरी और उच्च भत्ते की मांग जल्द ही मिल जाएगी. चूँकि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी "सबका साथ सबका विकास" की बात भी करते आये है. Also Read: सातवे वेतन आयोग के भत्‍ते के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी आखिरी उम्मीद

केंद्र सरकार द्वारा सांतवा वेतन आयोग के तहत की गई सिफारिशों को लागू करने के बाद जून में पिछले साल कई अन्य नेताओं के साथ राष्ट्रीय संयुक्त कार्य परिषद (एनजेसीए) के संयोजक श्री शिवगोपाल मिश्रा ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली और रेल मंत्री सुरेश प्रभु से मुलाकात की थी। बैठक के दौरान गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने श्री मिश्रा को बताया कि "इस बैठक में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का आशीर्वाद था" तब से केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा, खासकर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी पे आश लगाये हुए है. Also Read: सातवें वेतन आयोग के भत्‍ते 01.01.2016 से लागू होंगें या मिलेगी क्षतिपूर्ति: एक विश्‍लेषण

इस हफ्ते की शुरुआत में, शिवगोपाल मिश्र ने कथित तौर पर कहे थे कि अगर उच्च भत्ते और न्यूनतम मजदूरी की उनकी मांगों में देरी हो तो वे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे। श्री मिश्रा ने ये भी कहा कि, "हम प्रधान मंत्री मोदी पर विश्वास करते हैं कि वे हमारी आखिरी उम्मीद हैं।" Also Read: Delay in 7th CPC Allowances: Is any compensation on the way

एक नजर अब तक के घटनाक्रम के विश्लेषण पर

सातवें वेतन आयोग ने नवम्बर, 2015 में सरकार को रिपोर्ट सौंप दी थी जिसकी जॉंच के लिए वित्त मंत्रालय के वेतन इंप्लीमेंटेशन सेल ने काम करना शुरू कर दिया. मिडिया में खबर आने लगी कि 1 जनवरी, 2016 को सिफारिशें लागू हो जाएंगी. उस दौरान यूनियन नेताओं ने सातवें वेतन आयोग की कई सिफारिशों पर जैसे नयूनतम वेतन की गणना, फिटमेंट फार्मूला, भत्तों के बंद करने आदि पर आपत्तियॉं दर्ज करायी थी. फिर सरकार ने एक इम्पावर्ड कमिटी का गठन किया और वेतन आयोग का मामला उसके हवाले किया. फिर मिडिया में आकलन आने शुरू हुए कि संसद सत्र से पूर्व घोषणा होगी, संसद सत्र के बाद घोषणा होगी, 1 अप्रैल से लागू किया जाएगा, 1 जून से लागू किया जाएगा, इंपावर्ड कमिटी ने वेतन आयोग की सिफारिशों में 30 प्रतिशत की वृद्धि की है आदि आदि, सभी अनुमान मंत्रालय द्वारा विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त करने के दावे के साथ किये गये थे, परंतु इस सबसे इतर सरकार ने आर.बी.आई. की फिस्कल रिपोर्ट और अन्य आर्थिक रिपोर्ट पर नजर रखी और न्यूनतम आर्थिक भार का रास्ता चुना. जून, 2016 के अंत में कैबिनेट द्वारा इंपावर्ड कमिटी को भूलते हुए वेतन आयोग की सिफा​रिशों पर निर्णय दिया गया जिसमें मूल वेतन पर की गयी सिफारिशों को करीब करीब ज्यों का त्यों लागू कर दिया गया अन्य आर्थिक भार पर कई कमिटी बिठा दी गयी जिसमें भत्तों की सिफारिशों पर जॉंच के लिए भी वित्त सचिव की अध्यक्षता में कमिटी बनी. कमिटी को चार महीने का समय दिया गया. आर.बी.आई. की मोनेटरी पॉलिसी और सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों का रोचक विश्लेषण पढ़ने के लिए क्लिक करें.Also Read: सातवें वेतन आयोग के मकान किराये एवं अन्य भत्तों पर बनी कमिटी की बैठकों का सिलसिला थमा अब क्या होगा इसके आगे

एनजेसीए ने कैबिनेट सचिव के समक्ष अपनी मांग भी रखी है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 1 जनवरी 2016 से उच्च आवंटन के साथ पूर्वव्यापी प्रभाव के साथ संशोधित भत्ता मिले. उच्च भत्ते के कार्यान्वयन में देरी के कारण केंद्र सरकार के कर्मचारियों की यूनियनों मई में एक राष्ट्रव्यापी हड़ताल करने कि धमकी दी है. Also Read: RBI is not against the HRA hike as per 7th CPC HRA; Analysis’

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