सातवें वेतन आयोग के भत्तो में हो रही डिजाइनर देरी: आशाएं अगले माह के लिए टली

सातवें वेतन आयोग के भत्तों में हो रही डिजाइनर देरी: आशाएं अगले माह के लिए टली

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सांतवे वेतन आयोग द्वारा सिफारिश की गई भत्तो की जाँच के लिए गठित लवासा कमिटी की रिपोर्ट वितमंत्री को सौपने की सम्भाव‍ित तारीख  "अगले सप्ताह " के चक्रव्‍यूह से बाहर आती नहीं दिख रही है.

एनडीटीवी ने एक "टॉप यूनियन ऑफिसियल" के हवाले से यह यह खबर प्रकाशित की है कि भत्तो की जाँच के लिए गठित कमिटी से जुड़े सदस्य के विदेश दौरे के कारण, कमिटी रिपोर्ट सौपने में अभी और देर कर सकती है.
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इसके अलावा केंद्रीय कर्मचारियो के कॉन्फ़ेडरेशन सीओसी कर्णाटका के महासचिव श्री पी एस प्रसाद ने अपने अधिकारिक ब्लॉग के माध्यम से सूचित किया है कि भत्तो की कमिटी इस सप्ताह कोई रिपोर्ट नहीं दे रही है.

श्री प्रसाद ने यह भी कहा है क‍ि वित्त मंत्रालय को अंतिम रिपोर्ट सौपें जाने के बाद अगली कवायद में कम से कम 15 दिन का समय लग सकता है. अर्थात मामले में अभी कम-से-कम 1 महीने की देरी है।

लगता है कि सरकार मई या जून 2017 की गर्मियों में ही केंद्रीय कर्मचारियो को नये एचआरए और भत्तो की ठंढक दे सकेगी.

केंद्रीय कर्मचारियो के लिए सांतवें वेतन आयोग के कई मसलों पर निर्णय लंबित  है तथा इसका पूर्ण क्रियान्वन "बीरबल की खिचडी" साबित होता दिख रहा है जो कि कर्मचारियो के सब्र का बार-बार इम्तिहान ले रहा है.
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सांतवा वेतन आयोग, केंद्रीय कर्मचारियो के वेतन एवं अन्य मसलों का समाधान करने की बजाय आयोग एवं
उसके बाद बनी कमिटियों के कार्यकाल को बढाती ज्यादा दिख रही है और समाधान की बजाय कर्मचारियों को म‍िल रहा है तारीख पर तारीख।

सातवें वेतन आयोग के भत्‍ते 01.01.2016 से लागू होंगें या मिलेगी  क्षतिपूर्ति: एक विश्‍लेषण : पढ़ने के लिए क्लिक करेंं

इससे पूूूूर्व paramnews.com टीम ने नेशनल काउंसिल, जे सी एम (स्टाफ साईड) के पत्रोंं के आधार पर यह सकारात्मक आकलन दिया था की सरकार 23 अप्रैल 2017 से पहले सांतवें वेतन आयोग के भत्तो को लागू कर सकती है. प्रमुख मीडिया ने भी इसी प्रकार की संभावना व्यक्त की थी कि इसी सप्ताह लवासा कमिटी अपनी रिपोर्ट सौंप वित्‍त मंत्रालय को सौंप देगी.⁠⁠⁠⁠

सातवें वेतन आयोग ने नवम्बर, 2015 में सरकार को रिपोर्ट सौंप दी थी जिसकी जॉंच के लिए वित्त मंत्रालय के वेतन इंप्लीमेंटेशन सेल ने काम करना शुरू कर दिया. मिडिया में खबर आने लगी कि 1 जनवरी, 2016 को सिफारिशें लागू हो जाएंगी. उस दौरान यूनियन नेताओं ने सातवें वेतन आयोग की कई सिफारिशों पर जैसे नयूनतम वेतन की गणना, फिटमेंट फार्मूला, भत्तों के बंद करने आदि पर आपत्तियॉं दर्ज करायी थी. फिर सरकार ने एक इम्पावर्ड कमिटी का गठन किया और वेतन आयोग का मामला उसके हवाले किया. फिर मिडिया में आकलन आने शुरू हुए कि संसद सत्र से पूर्व घोषणा होगी, संसद सत्र के बाद घोषणा होगी, 1 अप्रैल से लागू किया जाएगा, 1 जून से लागू किया जाएगा, इंपावर्ड कमिटी ने वेतन आयोग की सिफारिशों में 30 प्रतिशत की वृद्धि की है आदि आदि, सभी अनुमान मंत्रालय द्वारा विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त करने के दावे के साथ किये गये थे, परंतु इस सबसे इतर सरकार ने आर.बी.आई. की फिस्कल रिपोर्ट और अन्य आर्थिक रिपोर्ट पर नजर रखी और न्यूनतम आर्थिक भार का रास्ता चुना. जून, 2016 के अंत में कैबिनेट द्वारा इंपावर्ड कमिटी को भूलते हुए वेतन आयोग की सिफा​रिशों पर निर्णय दिया गया जिसमें मूल वेतन पर की गयी सिफारिशों को करीब करीब ज्यों का त्यों लागू कर दिया गया अन्य आर्थिक भार पर कई कमिटी बिठा दी गयी जिसमें भत्तों की सिफारिशों पर जॉंच के लिए भी वित्त सचिव की अध्यक्षता में कमिटी बनी. कमिटी को चार महीने का समय दिया गया. आर.बी.आई. की मोनेटरी पॉलिसी और सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों का रोचक विश्लेषण पढ़ने के लिए क्लिक करें Delay In 7th CPC HRA in View Of RBI First Bi-monthly Monetary Policy Report ?

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