सैनिकों को नॉन फंक्शनल अपग्रडेशन देने के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट में

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को आर्म फोर्सेज के ट्रिब्यूनल (एएफटी) के फैसले, जो सशस्त्र बलों को गैर-कार्यात्मक अपग्रेड (एनएफयू) देने की मंजूरी प्रदान कर की है, के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कदम रखा. हालांकी केंद्र के इस फैसले ने सैन्य कर्मियों के बीच व्याप्त रोष को बढ़ा दिया है.

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केंद्र सरकार द्वारा स्पेशल लीव पेटीशन (एसएलपी) उस समय दायर किया गया, जब सेना के कर्मचारियों को सातवां वेतन आयोग द्वारा अनुशंसित अपने नए वेतन में एनएफयू का लाभ प्राप्त होने ही वाले ही थे. Also Read: सांतवे वेतन आयोग के भत्तों में हो रही डिजाइनर देरी: आशाएं अगले माह के लिए टली

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रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक एनएफयू को देने के लिए सशस्त्र सेना के ट्रिब्यूनल (एएफटी) के फैसले को सरकार द्वारा चुनौती देने के फैसले, को कानूनी तौर पर सही कहा गया तथा ये भी कहा गया कि उक्त न्यायाधिकरण (एएफटी) को इस तरह के व्यापक फैसले लेने का कोई अधिकार नहीं है, हालांकी स्रोत की माने तो सरकार वास्तव में, इन सेवाओं के लिए एनएफयू के खिलाफ नहीं थी. Also Read: सातवें वेतन आयोग के भत्‍ते 01.01.2016 से लागू होंगें या मिलेगी क्षतिपूर्ति: एक विश्‍लेषण

कोर विसंगति

"एनएफयू" नान-फंक्‍शनल अपग्रेड, सातवें वेतन आयोग द्वारा की गई सिफारिशों की मूल विसंगतियों में से एक रहा है, जो अभी तक सैन्य कर्मियों के लिए लागू नहीं किए गए हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत का हवाला देते हुए कहा गया है कि अप्रैल के अंत तक इन मुद्दों को सुलझाया जाएगा। एनएफयू एक बैच के सभी अधिकारियों को, वह भी जो पदोन्नत नहीं हैं, एक वेतन और ग्रेड पेय को प्राप्त करने के लिए हकदार हैं, जो कि उनके बैच के वरिष्ठ-सबसे अधिकारी एक निश्चित अवधि के बाद प्राप्त करेंगे। उदाहरण के लिए, भारत सरकार के सचिव के बैच के सभी अधिकारी, जिन्हें पदोन्नत नहीं किया गया है, वे निश्चित अवधि के बाद उसी वेतन के हकदार होंगे. Also Read: सातवें वेतन आयोग के मकान किराये एवं अन्य भत्तों पर बनी कमिटी की बैठकों का सिलसिला थमा अब क्या होगा इसके आगे

दरअसल सैन्‍य बलों की प्रमुख मांगों में से एक नान-फंक्‍शनल अपग्रेड (एनएफयू) का मसला है. ये सुविधा नौकरशाहों को उपलब्‍ध है लेकिन सैन्‍य बलों को यह सुविधा नहीं मिलती. ये वास्‍तव में उच्‍च प्रशासनिक ग्रेड (एचएजी) में शामिल होने तक ऑटोमेटिक समयबद्ध ढंग से वेतन में बढ़ोतरी से संबंधित है. इसके अलावा सिविल नौकरशाही से भिन्‍न वेतनमान का मामला भी है. Also Read:  Delay in 7th CPC Allowances: Is any compensation on the way

छठे वेतन आयोग में ज्यादातर समूह 'ए' अधिकारियों को एनएफयू प्रदान किया था, जबकि सैन्य और अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों को नहीं, तब से सैन्य और अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों ने समानता सुनिश्चित करने के लिए वन टाइम नेशनल एनएफयू की मांग कर रहे थे.


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