सातवां वेतन आयोग: सरकारी कर्मचारियों के वेतन और भत्ते संबधी विसंगतियों को हल करने की अंतिम तिथि जारी

कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डी ओ पी टी) ने नए आदेश जारी करते हुए कहा है कि सातवां वेतन आयोग के कार्यान्वयन में उत्पन्न होने वाले, केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के वेतन और भत्ते की भुगतान संबंधी विसंगतियों को हल करने की समय सीमा 15 नवंबर तक होगी.

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नई दिल्ली 11 मई: केंद्र सरकार द्वारा सातवां वेतन आयोग के कार्यान्वयन में उत्पन्न होने वाले, सरकारी कर्मचारियों की वेतन संबंधी विसंगतियों को प्राप्त करने और निपटान की समय सीमा तीन महीने के लिए बढ़ा दी गई है.

कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डी ओ पी टी) द्वारा जारी किए गए नये आदेश के अनुसार, सातवां केंद्रीय वेतन आयोग (7th CPC) की रिपोर्ट के कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाली कोई भी विसंगति को हल करने की समय सीमा 15 अगस्त के बजाय अब 15 नवंबर होगी.

केंद्र सरकार ने सातवां वेतन आयोग की बहुत सी सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है, जो की 1 जनवरी 2016 से लागू किया जाना है. हालांकी ये केंद्र सरकार पर निर्भर है की संशोधित मकान किराया भत्ता को कब से देने की बात को स्वीकार करता है. यह प्रश्न अभी भी कर्मचारियों को सता रहा है. क्या यह दर 01.01.2016 से लागू की जाएगी या फिर वेतन आयोग लागू होने के समय यानी अगस्त, 2016 से यह लागू होगी.

"विसंगतियों की प्राप्ति की समय सीमा अब विसंगतियों की प्राप्ति कि समाप्ति की तारीख से तीन महीने तक, यानि, 15 मार्च 2017 से बढाकर 15 मई 2017 तक बढ़ा दी गई है," पिछले सप्ताह जारी एक आदेश में डीओपीटी ने कहा,

बता दें कि, डीओपीटी ने पिछले साल सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के बाद वेतन और भत्ते संबंधी सामने आई विभिन्न विसंगतियां को दूर करने के लिए सभी केंद्रीय सरकारी विभागों को विसंगति कमिटी की स्थापना हेतू आदेश जारी किया था.

विसंगति कमिटी का गठन दो स्तरों पर होना था - राष्ट्रीय स्तर और विभागीय स्तर पर. राष्ट्रीय परिषद जहाँ आधिकारिक पक्ष वहीं विभागीय परिषद का स्टाफ पक्ष के प्रतिनिधियों के रूप में गठन की जानी थीं. साथ ही, विभागीय विसंगति कमिटी की अध्यक्षता अपर सचिव या संयुक्त सचिव (प्रशासन) करेंगे.

"राष्ट्रीय विसंगति कमिटी, दो या दो से अधिक विभागों के लिए तथा सामान्य वर्गों के कर्मचारियों के संबंध में विसंगतियों से निपटेंगे. डीओपीटी ने कहा था, "विभागीय विसंगति कमिटी संबंधित विभागों को विशेष रूप से संबंधित विभागीय अनियमितताओं को देखेगी. साथ ही, वित्तीय सलाहकार की राय में किसी अन्य मंत्रालय या विभाग के कर्मचारियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा"

संबंधित परिषद के कमिटीयों को, कर्मचारी पक्ष के सचिव के माध्यम से विसंगतियों को प्राप्त करने के लिए अनिवार्य किया गया है तथा उन मामलों में जहां विसंगति की परिभाषा के बारे में कोई विवाद होता है या उन मामलों में जहां विसंगति पर, स्टाफ पक्ष और आधिकारिक पक्ष के बीच असहमति होती है, उन्हें "आर्बिरेटर" द्वारा निपटाया जाएगा, जिसे उन नामों के पैनल से नियुक्त किया जाएगा, जिसमे दोनों पक्षों ने सहमती होगी.

साथ ही, राष्ट्रीय और विभाग स्तर पर विसंगति समितियों में होने वाले विवादास्पद मामलों पर "आर्बिरेटर" विचार करेगा.

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