दिल’ के लिए दिखाई दरियादिली: भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण व जेट एयरवेज ने उठाया कदम

दिल’ के लिए दिखाई दरियादिली: भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण व जेट एयरवेज ने उठाया कदम

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नई दिल्ली: दूसरे शहरों से विमान से दिल व लिवर लाकर दिल्ली के अस्पतालों में प्रत्यारोपित करना बड़ी बात नहीं रही. करीब हर महीने दूसरे शहरों से अंगदान में मिले दिल व लिवर को यहां लाकर मरीजों को प्रत्यारोपित किया जाता है.

लेकिन पहली बार अंगदान में मिले दिल को बेकार होने से बचाने और एक मरीज को जिंदगी देने के लिए शनिवार को चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर विमान को रोककर रखा गया. उस दिल के लिए जेट एयरवेज के विमान ने आधे घंटे देर से उड़ान भरी. इसलिए दिल को सही सलामत दिल्ली लाकर एम्स में कोलकाता के मरीज को प्रत्यारोपित किया जा सका. 

इस सफल हृदय प्रत्यारोपण के लिए एम्स के कार्डियक सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ. बलराम ऐरन ने पीजीआइ चंडीगढ़, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया), जेट एयरवेज व विमान के यात्रियों के सहयोग की तारीफ की है, जिनके सहयोग से दिल को चंडीगढ़ से दिल्ली लाया जा सका. 

यदि प्राधिकरण, जेट एयरवेज के अधिकारी व यात्री तैयार नहीं होते तो दान में मिला दिल बेकार होता. डॉ. बलराम ऐरन ने कहा कि पीजीआइ चंडीगढ़ में सड़क हादसे के शिकार 48 वर्षीय पुरुष को ब्रेन डेड घोषित किया गया था. उसके दिल दान की सूचना यहां देर से मिली. स्थिति यह थी कि एम्स की टीम को दिल्ली से चंडीगढ़ जाने के लिए अंतिम फ्लाइट में भी टिकट नहीं मिला. लिहाजा पीजीआइ के कार्डियक सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ. श्याम से आग्रह किया कि उनकी टीम खुद डोनर से हृदय दान कराकर दिल्ली एयरपोर्ट तक पहुंचा दे.

पीजीआइ की टीम इस बात पर राजी हो गई. एक दिक्कत यह भी थी कि चंडीगढ़ से दिल्ली की अंतिम फ्लाइट शाम को 6.05 बजे थी. हृदय रीटिवल में देरी के कारण विमान के उड़ान का समय निकल रहा था. इसलिए प्राधिकरण व जेट एयरवेज के अधिकारियों से विमान को आधे घंटे रोककर रखने का आग्रह किया गया. 

चंडीगढ़ यातायात पुलिस की मदद से एयरपोर्ट पर दिल पहुंचने के बाद विमान ने आधे घंटे की देरी से दिल्ली के लिए उड़ान भरी. शाम करीब 7.30 बजे विमान दिल लेकर दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा. वहां से दिल्ली यातायात पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाकर एंबुलेंस से एम्स में दिल लाने में मदद की. यह दिल्ली 46 वर्षीय मरीज को प्रत्यारोपित किया गया.

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