होम लोन पर ब्‍याज सब्सिडी योजना की अवधि 15 माह और बढ़ाई गई 2.60 लाख रुपये तक की सब्सिडी अब मार्च, 2019

मध्‍यम आय वर्गों (एमआईजी) के लिए होम लोन पर ब्‍याज सब्सिडी योजना की अवधि 15 माह और बढ़ाई गई 
2.60 लाख रुपये तक की सब्सिडी अब मार्च, 2019 तक मिलेगी
केन्‍द्र सरकार किफायती आवास के लक्ष्‍यों की प्राप्ति के लिए अचल सम्‍पत्ति उद्योग की चिंताओं पर गौर करेगी 

केन्‍द्र सरकार ने आज घोषणा की कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत होम लोन पर लगभग 2.60 लाख रुपये की ब्‍याज सब्सिडी का लाभ मध्‍यम आय वर्गों (एमआईजी) से संबंधित लाभार्थियों को इस साल दिसम्‍बर के बाद 15 और महीनों तक मिलेगी.
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इस आशय की घोषणा भारत सरकार के सचिव (आवास एवं शहरी मामले) श्री दुर्गा शंकर मिश्रा ने की. वह आज मुम्‍बई में एनएआरईडीसीओ द्वारा आयोजित ‘अचल सम्‍पत्ति एवं बुनियादी ढांचा निवेशक शिखर सम्‍मेलन’ को संबोधित कर रहे थे. उन्‍होने कहा कि सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत ब्‍याज सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए एमआईजी लाभार्थियों को कुछ और समय देने का निर्णय लिया है. 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने पिछले साल 31 दिसम्‍बर को घोषणा कर प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत ऋण संबद्ध सब्सिडी योजना (सीएलएसएस) को इस साल दिसम्‍बर के आखिर तक एमआईजी के लिए भी मान्‍य कर दिया था. सीएलएसएस के तहत 6.00 लाख रुपये से ज्‍यादा और 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले एमआईजी लाभार्थियों को 9 लाख रुपये के 20 वर्षीय ऋण पर 4 फीसदी ब्‍याज सब्सिडी मिलेगी. वहीं, 12 लाख रुपये से ज्‍यादा और 18 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले लाभार्थियों को 3 फीसदी ब्‍याज सब्सिडी मिलेगी.
वर्ष 2022 तक शहरी क्षेत्रों में ‘सभी के लिए आवास’ लक्ष्‍यों की प्राप्ति के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का फिर से उल्‍लेख करते हुए श्री मिश्रा ने निजी निवेशकों से किफायती आवास में निवेश करने का अनुरोध किया, जिसे सरकार तरह-तरह के प्रोत्‍साहनों एवं रियायतों के साथ बड़े पैमाने पर प्रवर्तित कर रही है. 

श्री मिश्रा ने बाद में एनएआरईडीसीओ के 30 सदस्‍यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ एक घंटे बातचीत की और उन्‍हें आश्‍वासन दिया कि सरकार उनके द्वारा उठाये गये विभिन्‍न मुद्दों पर गौर करेगी तथा संभावित कदम उठाने पर विचार किया जाएगा. 

प्रतिनिधिमंडल ने पूर्ण एवं निर्माणाधीन परियोजनाओं के लिए तय जीएसटी दरों की विसंगतियों का भी उल्‍लेख किया. 

प्रतिनिधिमंडल ने इस बात पर चिंता जताई कि आवासीय परिसंपत्तियों की लागत में जीएसटी एवं अन्‍य करों का योगदान एक तिहाई से भी ज्‍यादा है.

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