रंगीन राधे मां कि जेल की तैयारी: हाईकोर्ट ने दिए रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश

रंगीन राधे मां कि जेल की तैयारी: हाईकोर्ट ने दिए रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश

नई दिल्ली: खुद को देवी का अवतर कहने वाली राधे मां अब कानून के शिकंजे से बचने वाली नहीं. सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के बाद अब राधे मां की भी मुश्किलें बढ़ने लगी हैं. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने मंगलवार को राधे मां के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया है. 

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खास बातें
  • बॉलीवुड अभिनेत्री डॉली बिंद्रा ने लगाया था यौन उत्पीड़न का आरोप
  • विमान में त्रिशूल लेकर यात्रा करने पर हुई थी राधे मां के खिलाफ FIR
  • अब लगा है राधे मां पर धमकी देने का आरोप, कोर्ट ने लिया संज्ञान
हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस को ये निर्देश सुरिंदर मित्तल की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है. राधे मां को इस मामले में दो साल पहले पंजाब पुलिस ने पूछताछ के लिए समन भेजा था. सुरिंदर ने अगस्त, 2015 में पंजाब पुलिस से राधे मां के खिलाफ शिकायत की थी. उसने राधे मां पर धमकाने का आरोप लगाया और पुलिस को फोन रिकॉर्डिंग भी दी. 

जानकारी के मुताबिक, 15 साल पहले फगवाड़ा में खुद को देवी का अवतर कहने वाली राधे मां के जागरण का आयोजन किया गया था. इस दौरान कुछ लोगों ने राधे मां का जमकर विरोध किया. इस विरोध की अगुवाई सुरिंदर मित्तल कर रहे थे. मित्तल ने आरोप लगाया कि इसके बाद राधे मां उन्हें धमकाने लगीं. 

सारे सबूत देने के बाद भी जब पुलिस ने राधे मां के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं की तो सुरिंदर ने कोर्ट की शरण ली. कोर्ट ने पुलिस को राधे मां के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए. 

रंगीन राधे मां की एक झलक 

राधे मां का असली नाम सुखविंदर कौर है और वह मूल रूप से पंजाब के होश‍ियारपुर शहर के मुकरियां की रहने वाली हैं. उनकी शादी 17 साल की उम्र में मोहन सिंह से हुई थी. उनके पति मिठाई की दुकान में काम करते थे. घर की तंगहाली कम करने के लिए सुखविंदर लोगों के कपड़े सिला करती थी. कुछ समय बाद उनके पति नौकरी करने के लिए दोहा चले गए जिसके बाद वो परमहंस डेरा में जाने लगीं. 

महंत रामाधीन से दीक्षा लेने के बाद आस-पड़ोस के लोग उन्‍हें अपने घरों में होने वाले सत्‍संगों में बुलाने लगे. लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही उन्‍होंने अपने पहनावे को भी बदल दिया और किसी देवी मां की तरह तैयार होने लगीं. आज राधे मां के नाम पर एक मंदिर और एक आश्रम भी है. बताया जाता है कि उनके भक्‍तों और समर्थकों ने ही उन्‍हें राधे मां का नाम दिया है. हालांकि कई धार्मिक संगठन उनके इस नाम और पहनावे पर कई बार आपत्ति जता चुके हैं.

वर्तमान में राधे मां मुंबई में रहती हैं. हर दूसरे हफ्ते उनके भवन में माता की चौकी, सत्‍संग और जागरण होता है जिसमें हज़ारों भक्‍त शामिल होते हैं. इन भक्‍तों में आम से लेकर बेहद खास यहां तक कि फिल्‍मी हस्‍तियां भी शरीक होती हैं. यही नहीं राधे मां खुले मैदान में दिव्‍य दर्शन भी देती हैं. उनके समर्थकों का दावा है कि राधे मां कभी-कभार ही गहने पहनती हैं और फिर उन्‍हें उतार देती हैं. अकसर वे इन गहनों को जरूरतमंद दुल्‍हनों को भेंट कर देती हैं. कहा तो यहां तक जाता है कि राधे मां के भक्‍त ही नहीं चाहते कि वो किसी संन्‍यासिन की तरह पोशाक पहनें. भक्‍त अपनी मां को सोलह श्रृंगार के साथ देवी के रूप में ही देखना पसंद करते हैं. 

भक्‍तों का मानना है कि राधे मां के पास दैवीय शक्‍तियां हैं. हालांकि वो खुद कभी ऐसा दावा नहीं करती हैं. उनकी वेबसाइट पर डिवाइन एक्‍सपीरियंस के नाम से एक सेक्‍शन है जिसमें एक भक्‍त ने बताया है कि उसके सीने में बहुत तेज दर्द हो रहा था और कैसे राधे मां के सिर पर हाथ रखते ही दर्द छूमंतर हो गया. भक्तों की मानें तो त्रिशूल के जरिए वो भगवान से जुड़ती हैं और जब भी वो भक्तों के सामने आती हैं तो उनके हाथ में ये त्रिशूल जरूर होता है.

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