सेना में अधिकारियों के सात रैंक ही रहेंगे

सेना में अधिकारियों के सात रैंक ही रहेंगे

सेना में अफसरों के करियर को आकर्षक बनाने के लिए जल्द ही अहम बदलाव हो सकते हैं. नए प्रस्ताव के तहत अफसर मेजर के बाद सीधे कर्नल बनेंगे और कर्नल के बाद मेजर जनरल पद पर तैनाती मिलेगी. मेजर के बाद लेफ्टिनेंट कर्नल और कर्नल के बाद ब्रिगेडियर के मौजूदा पद खत्म हो सकते हैं.

लंबे समय से चल रही थी रैंकों में बदलाव की मांग 

सेना से जुड़े सूत्रों ने कहा कि रैंक में बदलाव को लेकर लेफ्टिनेंट जनरल स्तर के अधिकारियों के अधीन चार विशेषज्ञ समितियां गठित की गई हैं. जो नवंबर के अंत तक रिपोर्ट सौंपेंगी. इन समितियों में विचार-विमर्श की प्रक्रिया अंतिम चरण में है. पदों के नए स्वरूप का खाका लगभग तैयार हो चुका है.


सेना में अधिकारियों के सात रैंक ही रहेंगे

सेना में अफसरों की एंट्री से लेकर शीर्ष तक पहले दस पद होते थे. रक्षा अकादमी से निकलने के बाद सेकेंड लेफ्टिनेंट के रूप में भर्ती होती थी. उसके बाद लेफ्टिनेंट, कैप्टन, मेजर, ले.कर्नल, कर्नल, ब्रिगेडियर, मेजर जनरल, ले. जनरल तथा उसके बाद जनरल का पद होता है. लेकिन सेकेंड लेफ्टिनेंट का रैंक पहले ही खत्म किया जा चुका है. अब सीधे लेफ्टिनेंट के रैंक पर भर्ती होती है. नए प्रस्ताव के तहत मेजर के बाद सीधे कर्नल बनेंगे। कर्नल के बाद मेजर जनरल। सिर्फ सात रैंक ही रह जाएंगे.

नौसेना एवं वायुसेना की स्थिति

नौसेना एवं वायुसेना में अफसरों के रैंक कम होने की वजह से बेहतर स्थिति है. नौसेना में कर्नल के रैंक का पद कैप्टन और वायुसेना में ग्रुप कैप्टन होता है. कैप्टन एवं ग्रुप कैप्टन बनने वाले कुछ सालों के बाद कमोडोर और एयर कमोडर पद पर पहुंच जाते हैं. लेकिन कर्नल के लिए ब्रिगेडियर बनने की राह कठिन होती है, क्योंकि 10 कर्नल में से महज तीन को ही आगे प्रोन्नति मिल पाती है.

  • सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में करियर शुरू करने वाले ज्यादातर अधिकारी नई व्यवस्था में मेजर जनरल रैंक तक पहुंच सकेंगे.
  • रैंकों में बदलाव से सेना परोक्ष रूप से अधिकारियों की क्षमता में इजाफा कर अपने खर्च में कमी लाना चाहती है.
  • तीसरा रक्षा मंत्रालय का मानना है कि इससे सेना में अफसर बनने के लिए नौजवानों में आकर्षण बढ़ेगा.

कर्नल तक पहुंचने के बाद ज्यादातर सैन्य अधिकारियों के करियर को ब्रेक लग जाता है. केंद्र सरकार के कार्मिकों से तुलना करें तो कर्नल का पद निदेशक स्तर का होता है. केंद्रीय सेवाओं में भर्ती होने वाले ज्यादातर अफसर संयुक्त सचिव या इसके ऊपर के पदों तक पहुंचते हैं. लंबे समय से रैंकों में बदलाव की मांग चल रही थी.

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