सैन्य अफसरों के लिए बने बंगले में होटल रक्षा संपदा विभाग की लापरवाही : कैग

सैन्य अफसरों के लिए बने बंगले में होटल रक्षा संपदा विभाग की लापरवाही : कैग

छावनी परिषद का कहना है कि आवंटी ने 1995 में बंगले में एक म्यूजियम एवं गेस्ट हाउस बनाने के लिए आवेदन किया था. लेकिन उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया. 2005 में रक्षा संपदा कार्यालय बरेली ने स्पष्ट किया कि आवासी संपत्ति में व्यावसायिक गतिविधि की इजाजत नहीं दी जा सकती. कैग ने इस बात पर आश्चर्य प्रकट किया है कि रक्षा संपदा विभाग ने न तो बंगले का किराया वसूला और न ही लीज रद्द कर उसे वापस लेने की कार्रवाई शुरू की. इस बारे में जब सीएजी ने विभाग से पूछा तो उसके कहा कि काम का बोझ अधिक था इसलिए यह प्रक्रिया शुरू नहीं की गई.

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सैन्य अफसरों के लिए बने रक्षा महकमे के बंगले में होटल चल रहा था लेकिन महकमे को खबर ही नहीं थी. होटल 1995 से चल रहा था और 2016 में ऑडिट में यह मामला पकड़ में आया.

इससे पहले न तो रक्षा संपदा विभाग को इस मामले की खबर थी और न ही वह इस भवन का किराया ले रहा था. इस बारे में जब रक्षा संपदा विभाग को जवाब-तलब किया गया तो उसने कहा कि हमारे पास बहुत काम है, इसलिए नोटिस नहीं दे पाए. संसद में पेश कैग की रिपोर्ट ने कहा कि पहले भी उसने अपनी रिपोर्ट में इस तरह के अवैध कब्जों को हटाने की सिफारिशें की हैं. लेकिन संपत्ति विभाग इसमें विफल रहा है. सीएजी ने कहा कि तुरंत इस बंगले को खाली कर उससे 7.48 करोड़ रुपये का किराया वसूल किया जाए। साथ ही अवैध निर्माण भी हटाया जाए.

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यह मामला छावनी परिषद रानीखेत का है. ओल्ड ग्रांट बंग्ला सैन्य अफसरों के लिए बनाया गया था. लेकिन कई बार बंगले खाली रहते हैं तो रक्षा संपदा विभाग स्थानीय वासियों को सिविल प्रशासन की अनुमति पर किराये पर आवंटित कर देता है. इस मामले में भी यह बंगला किसी को रहने के लिए आवंटित किया गया. जिसका किराया भी तय किया गया. लेकिन जिसे बंगला आवंटित था उसने 1995 में उसमें होटल चलाना शुरू कर दिया. उसने अवैध तरीके से बंगले में पांच हट और एक स्वीमिंग पूल भी बना डाला. लेकिन कोई किराया नहीं भरा.

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Source: epaper.livehindustan
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