केंद्रीय सचिवालय सेवा में प्रोन्नति नियमों में बदलाव नहीं

 केंद्रीय सचिवालय सेवा में प्रोन्नति नियमों में बदलाव नहीं 

सीएसएस केंद्रीय स्तर पर प्रशासनिक कामकाज के लिए अहम सेवा है. इसमें विभिन्न स्तरों पर करीब 12 हजार पद हैं. प्रोन्नति में विलंब और नई भर्तियां न होने से कई पद खाली हैं. एसओ, अंडर सेक्रेटरी और डिप्टी सेक्रेटरी के करीब ढाई हजार पद रिक्त हैं. सीएसएस को प्रोन्नति के लिए पात्र होने के बावजूद नान फंक्शनल बेनीफिट नहीं दिया जाता. जबकि आईएएस सहित 49 सेवाओं को यह लाभ दिया जाता है. सीएसएस को संगठित सेवा के रूप में मान्यता देने की मांग भी सरकार ने स्वीकार नहीं की है.

केंद्रीय सचिवालय सेवा में प्रोन्नति के लिए नियमों में बदलाव का डीओपीटी का प्रस्ताव कैबिनेट सचिव ने खारिज कर दिया है. कैबिनेट सचिव ने सीएसएस रूल 1962 के पुराने नियम के तहत ही प्रोन्नति प्रक्रिया पूरी करने को कहा है. पेच के चलते सीएसएस के कुल अनुमोदित पदों में से करीब 40 फीसदी पद खाली है.


डीओपीटी ने बदलाव का प्रस्ताव दिया था

सचिवालय सेवा के अफसरों की प्रोन्नति 1962 के सीएसएस रूल के तहत होता था. इसके तहत इन्हें अप्रूव्ड सर्विस के दायरे में रखते हुए अनुमोदन के बाद रिक्त पद के वर्ष से प्रोन्नति के लिए पदों की गणना होती थी. लेकिन डीओपीटी ने नियमों में बदलाव का प्रस्ताव करते हुए सीएसएस सेवा को नियमित सेवा के दायरे में लाने का फैसला किया था. इसकी वजह से रिक्तियों के बजाए जिस तिथि से नियमित नियुक्ति होती है, उसकी गणना करके प्रोन्नति देने का प्रस्ताव था.


नुकसान की आशंका

इस संबंध में सीएसएस के संगठन ने कैबिनेट सचिव से मुलाकात की थी. संगठन का कहना था कि लंबित प्रोन्नति प्रक्रिया नियमों में बदलाव से और भी ज्यादा बाधित होगी. इसका बड़ा नुकसान होगा कि विभिन्न पदों पर प्रोन्नति के लिए पात्र लोगों की संख्या में कमी आएगी. सीएसएस का तर्क है कि इससे कामकाज भी प्रभावित होगा, क्योंकि विभिन्न जरूरी पदों पर बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं. 

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