सेवानिवृत होने के बाद भी मुक़दमे से नहीं बच सकते है: सुप्रीम कोर्ट

सेवानिवृत होने के बाद भी मुक़दमे से नहीं बच सकते है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी जनसेवको के भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक फैसले व्यबस्था दी है कि समय बीतने के साथ रिटायर हुए जनसेबको को उनके आपराधिक जिम्मेदारी से छुट नहीं दी जा सकती है. वह भी तब जब मामला भ्रष्टाचार विरोधी कानून के तहत किये गये अपराध का हो.

यह फैसला देते हुए जस्टिस रंजन गोगाई की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने हिमाचल प्रदेश के दो जूनियर इनजीनियरों सजा देने वालें हाई कोर्ट के फैसले को वरकरार रखा और उनकी अपीलें ख़ारिज कर दी. सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सेवानिवृत होने के बाद भी कोई भी सरकारी/गैर-सरकारी कर्मचारी मुक़दमे से नहीं बच सकते है, रिटायर हुए इन जनसेबको को उनके आपराधिक जिम्मेदारी से छुट नहीं दी जा सकती है.

गैरतलब है कि यह मामला हिमाचल प्रदेश के एक सरकारी स्कुल के निर्माण का है. दो जूनियर इनजीनियरों ने स्कुल निर्माण के लिए आए सीमेंट में घपला किया था, जिससे स्कुल की ईमारत नहीं वन पाई.

एक जेई ने सीमेंट जारी किया था और दूसरा ने इसे प्राप्त किया था. लेकिन यह सीमेंट स्कुल नहीं पहुँच पाया. जांच में सिद्ध हो गया था कि दोनों के बीच सीमेंट का लेन देन किया गया था. 

इस मामले में राज्य सरकार ने दोनों के खिलाफ केस दर्ज किया था. लेकिन मामला लम्बा खिच गया, जिसके दौरान दोनों जूनियर इनजीनियर सेवानिवृत हो गए.

कोर्ट तय करेगा सेना पर केस हो सकता या नहीं

क्या जम्मू कश्मीर में सैन्य कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए केंद्र सरकार की अनुमति की जरूरत है. सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे को निर्णित करेगा, जिसमें आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर एक्ट(अफ्स्पा), 1990 की धारा 7 की व्याख्या की जाएगी. मामले की सुनवाई 30 जुलाई को होगी. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ मेजर आदित्य कुमार के पिता की याचिका पर विचार कर रही है. इसमें उन्होंने अपने बेटे के खिलाफ दायर एफआईआर को चुनौती दी है. यह एफआईआर शोपियां में तब दर्ज की गई थी, जब सेना की फायरिंग में एक पत्थरबाज की मौत हो गई थी..

govt-employees-can-not-escape-litigation-even-after-retirement-supreme-court
Source
Share:

No comments:

Post a Comment

Followers