Monday, 10 February 2020

Shortage of Women Teachers | प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के विदयालयों में महिला शिक्षकों की अत्यधिक कमी

Shortage of Women Teachers in Primary Upper Primary and Secondary level Schools प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के विदयालयों में महिला शिक्षकों की अत्यधिक कमी

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GOVERNMENT OF INDIA
MINISTRY OF HUMAN RESOURCE DEVELOPMENT DEPARTMENT OF SCHOOL EDUCATION & LITERACY

LOK SABHA

UNSTARRED QUESTION NO. 5

ANSWERED ON 03.02.2020

Female Teachers

DR. AMOL RAMSING KOLHE
SHRI SHRINIWAS PATIL
SHRI KULDEEP RAI SHARMA
DR. DNV SENTHILKUMAR S.
SHRI SUNIL DATTATRAY TATKARE
SHRIMATI SUPRIYA SULE

Will the Minister of HUMAN RESOURCE DEVELOPMENT be pleased to state:

(a) whether there is an acute shortage of women teachers in primary, upper primary and secondary level schools in rural areas and a number of schools in rural areas operate out of Kachcha buildings and if so, the details thereof and the reasons therefor;

(b) whether the Government has assessed the student-women teacher ratio in the country and if so, the details thereof and the outcome thereof;

(c) whether the Government has conducted any survey/study to ascertain the required vis-a- vis actual teacher-student ratio in the country and if so, the details thereof and if not, the reasons therefor;

(d) whether the Government proposes to set up schools under PPP mode to impart quality education in the country particularly in rural areas and if so, the details thereof; and

(e) the steps taken/proposed to be taken to improve the teacher-student ratio and recruitment quality of teachers especially women teachers for the betterment of education system in rural areas?

ANSWER

MINISTER OF HUMAN RESOURCE DEVELOPMENT

(SHRI RAMESH POKHRIYAL ‘NISHANK’)

(a) to (e)  Education is in the Concurrent List of the Constitution, therefore, majority of the schools are under the jurisdiction of the respective State and Union Territory (UT) Government. Hence, the recruitment, service conditions and deployment of teachers as also management of the schools are primarily in the domain of the respective State Government and UT Administration. As per the Unified District Information System for Education (UDISE) 2018-19 (provisional), out of the total number of teachers in Government primary, upper primary and secondary schools in rural areas, 40.56% are female teachers and the total number of schools having Kachcha building blocks in rural areas is 24940.

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The Right of Children to Free and Compulsory Education (RTE) Act, 2009 in its Schedule lays down Pupil-Teacher Ratio (PTR) for both primary and upper primary schools which are 30:1 and 35:1 respectively. As per the framework of erstwhile scheme Rashtriya Madhyamik Shiksha Abhiyan (RMSA)- now subsumed under Samagra Shiksha, PTR at secondary level should be 30:1. As per UDISE 2017-18 (provisional), the PTR at national level for primary schools is 23:1, for upper primary schools is 25:1 and for Secondary level is 26:1. The recruitment of teachers is a continuous process and the vacancies keep arising due to retirement and additional requirements on account of enhanced students’ strength. However, Ministry of Human Resource Development has been requesting all the States and UT Governments for filling-up the vacant posts of teachers and their rational deployment, for which the Ministry issues advisories to all States and UTs from time to time.

Further, the Central Government through the Centrally Sponsored Scheme of Samagra Shiksha, provides assistance to the States and UTs for deployment of additional teachers to maintain appropriate Pupil Teacher Ratio as per the prescribed norms for various levels of schooling

भारत सरकार
मानव संसाधन विकास मंत्रालय स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग

लोक सभा

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अतारांकित प्रश्न संख्याः 5

उत्तर देने की तारीखः 03.02.2020

महिला शिक्षक

डॉ. अमोल रामसिह कोल्हे
श्री श्रीनिवास दादासाहिब पाटील
श्री कुलदीप राय शर्मा
श्री डी.एन.वी. सेंथिलकुमार एस.
श्री सुनील दत्तात्रेय तटकरे
श्रीमती सुप्रिया सदानंद सुल्रे

क्या मानव संसाधन विकास मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे किः

(क) क्‍या ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के विदयालयों में महिला शिक्षकों की अत्यधिक कमी है और ग्रामीण क्षेत्रों में कई विद्यालय कच्चे भवनोंमें संचालित हो रहे हैं और यदि हां, तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है और इसके कया कारण हैं;

(ख) क्‍या सरकार ने देश में विद्यार्थी-महिल्रा शिक्षक अनुपात का मूल्यांकन किया है और यदि हां, तो तत्संबंधी ब्योरा क्या है और तत्संबंधी कया परिणाम रहे;

(ग) कया सरकार ने देश में वांछित अनुपात की तुलना में शिक्षक विद्यार्थी के वास्तविक अनुपात का पता त्रगाने के लिए कोई सर्वेक्षण/अध्ययन किया है और यदि हां, तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है और यदि नहीं, तो इसके क्या कारण हैं;

(घ) क्या सरकार का देश में विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापरक शिक्षा प्रदान करने के लिए पीपीपी मोड के अंतर्गत विद्यालयों की स्थापना करने का विचार है और यदि हां, तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है; और

(ड) शिक्षक-विदयार्थी अनुपात को सुधारने के लिए क्‍या कदम उठाए गए हैं. उठाए जाने प्रस्तावित हैं और ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए योग्य शिक्षकों, विशेष रूप से महिला शिक्षकों की भर्ती करने के लिए क्‍या कदम उठाए गए हैं/उठाए जाने प्रस्तावित हैं?

उत्तर

मानव संसाधन विकास मंत्री

(श्री रमेश पोखरियाल्र “निशंक”)

(क) से (ड.) शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में है, इसलिए अधिकांश स्कूल संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इसलिए, शिक्षकों की भर्ती, सेवा शर्तों, तैनाती और स्कूलों का प्रबंधन मुख्य रूप से संबंधित राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के क्षेत्राधिकार में है। शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली (यूडीआईएसई) 2018-19 (अनंतिम) के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों की कुल संख्या में से 40.56 प्रतिशत महिला शिक्षक हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में कच्ची इमारत के ब्लॉक के कुल स्कूलों की संख्या 24940 है.


बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 अपनी अनुसूची में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय दोनों के लिए शिष्य-शिक्षक अनुपात (पीटीआर) निर्धारित करता है जो क्रमश: 30:1 और 35:1 है। पूर्ववर्ती योजना राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए)-अब समग्र शिक्षा के तहत समेकित, के अनुसार माध्यमिक स्तर पर पीटीआर 30:1 होना चाहिए। यूडीआईएसई 2017-18 (अनंतिम) के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर प्राथमिक स्कूलों के लिए पीटीआर 23:1 है, उच्च प्राथमिक स्कूलों के लिए 25:1 और माध्यमिक स्तर के लिए 26:1 है। शिक्षकों की भर्ती निरंतर प्रक्रिया है और सेवानिवृत्ति की वजह से रिक्तियां बढ़ती रहती हैं और छात्रों की संख्या में वृद्धि के कारण अतिरिक्त आवश्यकता होती रहती है। हालांकि, मानव संसाधन विकास मंत्रालय सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश सरकार से शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने और उसकी तर्कसंगत तैनाती के लिए अनुरोध करता रहता है, जिसके लिए मंत्रालय समय-समय पर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवायज़री जारी करता रहता है। इसके अलावा, केंद्र सरकार केंद्र प्रायोजित योजना समग्र शिक्षा के माध्यम से स्कूलों के विभिन्‍न स्तरों के लिए निधाीरित मानदंडों के अनुसार उपयुक्त शिक्षक-शिष्य अनुपात को बनाए रखने के लिए अतिरिक्त शिक्षकों की तैनाती हेतु राज्यों ओर केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता प्रदान करती है.

Source ”  Eng. http://164.100.24.220/loksabhaquestions/annex/173/AU5.pdf
Hindi http://164.100.24.220/loksabhaquestions/qhindi/173/AU5.pdf

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